ककराला में सौत नदी बनी कचरे का ढेर! नगर पालिका की लापरवाही पर उठे सवाल, शिकायत के बाद ADM ने दिए सफाई के सख्त निर्देश

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ककराला नगर पालिका क्षेत्र से पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां सौत नदी में लगातार कूड़ा-कचरा डाले जाने के कारण नदी का स्वरूप बिगड़ता जा रहा है। नदी के किनारे और पानी में जमा कचरे ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

बताया जा रहा है कि लंबे समय से सौत नदी में कचरा फेंके जाने की समस्या बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि सफाई व्यवस्था पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने के कारण नदी धीरे-धीरे कूड़े के ढेर में तब्दील होती जा रही है।

नदी में कचरा जमा होने से आसपास के क्षेत्र में गंदगी और दुर्गंध का माहौल बना हुआ है। इससे नदी के आसपास रहने वाले ग्रामीणों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित ग्राम प्रधान ने अपर जिलाधिकारी यानी ADM से शिकायत की और सौत नदी की स्थिति से अवगत कराया। शिकायत में नदी की सफाई कराने और लगातार कचरा डाले जाने पर रोक लगाने की मांग की गई।

शिकायत के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया। अपर जिलाधिकारी ने नगर पालिका परिषद ककराला के अधिशासी अधिकारी को सौत नदी से तत्काल कचरा हटवाने और सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

प्रशासन के निर्देश के बाद अब लोगों को उम्मीद है कि सौत नदी की सफाई जल्द शुरू होगी और लंबे समय से जमा कचरे को हटाया जाएगा। साथ ही नदी के आसपास दोबारा कचरा न डाला जाए, इसके लिए भी प्रभावी व्यवस्था की जरूरत है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी में कचरा फेंके जाने से केवल गंदगी ही नहीं बढ़ रही, बल्कि इसका सीधा असर पर्यावरण पर भी पड़ रहा है। यदि समय रहते इस समस्या पर रोक नहीं लगाई गई तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि नदी की सफाई के साथ-साथ कचरा फेंकने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि सिर्फ सफाई कराने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा, बल्कि कचरा डालने पर रोक लगाने के लिए निगरानी भी जरूरी है।

प्रशासन की ओर से नदी को साफ रखने और नियमित निगरानी कराने का आश्वासन दिया गया है। अब देखना होगा कि ADM के निर्देश के बाद नगर पालिका परिषद ककराला कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और सौत नदी को कचरे से कितनी जल्दी मुक्त कराया जाता है।

सौत नदी सिर्फ पानी की धारा नहीं, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण और लोगों के जीवन से जुड़ी धरोहर है। अब सवाल यही है—क्या प्रशासनिक निर्देश के बाद सौत नदी फिर से अपने पुराने साफ-सुथरे स्वरूप में लौट पाएगी?

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