बदायूं। जनपद बदायूं के जगत ब्लॉक क्षेत्र और नगर पंचायत सखानूं के ग्रामीण इलाकों में छुट्टा पशुओं की बढ़ती संख्या किसानों और राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार खेतों में घूम रहे पशु फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जबकि सड़कों पर झुंड के रूप में घूमने से वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों का कहना है कि खेती में लगातार बढ़ती लागत के बीच फसलों को छुट्टा पशुओं से बचाना एक अतिरिक्त चुनौती बन गया है। कई किसानों को अपनी खड़ी फसल की सुरक्षा के लिए दिन-रात खेतों की निगरानी करनी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों के खेतों में पशुओं के पहुंचने से गेहूं, धान, सब्जियों और अन्य फसलों को नुकसान होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। किसानों का कहना है कि मेहनत से तैयार की गई फसल यदि पशुओं के झुंड से खराब हो जाए तो इसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ता है।
समस्या को लेकर युवा मंच संगठन के बरेली मंडल उपाध्यक्ष लक्ष्य गुप्ता ने प्रशासन से प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि छुट्टा पशुओं की समस्या लगातार बढ़ रही है और इसका समाधान जल्द किया जाना आवश्यक है।
लक्ष्य गुप्ता के मुताबिक, मुख्य मार्गों और ग्रामीण सड़कों पर भी बड़ी संख्या में छुट्टा पशु दिखाई देते हैं। अचानक सड़क पर पशुओं के आ जाने से दोपहिया और अन्य वाहन चालकों को वाहन संभालने में परेशानी हो सकती है और दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल किसानों की फसलों तक सीमित नहीं है, बल्कि आम राहगीरों और वाहन चालकों की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में प्रशासन को ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ प्रमुख मार्गों पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
लक्ष्य गुप्ता ने बताया कि संगठन की ओर से प्रशासन का ध्यान इस समस्या की ओर पहले भी आकर्षित कराया गया है। अब उन्होंने प्रशासन से छुट्टा पशुओं को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए तत्काल अभियान चलाने की मांग की है।
उन्होंने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि निर्धारित समय में प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर युवा मंच संगठन आंदोलन का रास्ता अपना सकता है। उन्होंने हाईवे पर चक्का जाम करने की चेतावनी भी दी है।
युवा मंच संगठन ने मांग की है कि जगत ब्लॉक क्षेत्र और सखानूं के ग्रामीण इलाकों में अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को पकड़ा जाए और उन्हें सुरक्षित गौशालाओं में पहुंचाया जाए। साथ ही संवेदनशील मार्गों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की गई है।
फिलहाल छुट्टा पशुओं की समस्या को लेकर किसानों और ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है और किसानों की फसलों तथा राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किस तरह की व्यवस्था लागू की जाती है।



