वाराणसी में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सांसद पप्पू यादव और सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ संसद भवन में हुए एक प्रदर्शन को लेकर मामला सामने आया है। प्रदर्शन में किए गए नुक्कड़ नाटक को लेकर संत समाज ने आपत्ति जताई है।
बताया गया कि प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहने साधु के वेश में नजर आए। वे प्रतीकात्मक रूप से दान पात्र लेकर बैठे थे, जबकि राहुल गांधी ने उस पात्र में कुछ पैसे डालने का दृश्य प्रस्तुत किया।
इसके बाद पप्पू यादव द्वारा पैसे लेकर भागने का दृश्य दिखाया गया। आरोप है कि इस नाटकीय प्रस्तुति के माध्यम से राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने का प्रयास किया गया।
इस प्रदर्शन की जानकारी सामने आने के बाद वाराणसी के संत समाज में नाराजगी देखने को मिली। संतों ने धार्मिक प्रतीकों और साधु वेश के राजनीतिक प्रदर्शन में इस्तेमाल पर गंभीर आपत्ति जताई। पातालपुरी मठ के महंत बालक दास के नेतृत्व में बनारस के करीब आधा दर्जन संत शनिवार को डीसीपी काशी जोन गौरव बंसवाल से मिले और पूरे मामले को लेकर प्रार्थना पत्र सौंपा।
संतों ने आरोप लगाया कि संसद में साधु के वेश में किया गया प्रदर्शन और नुक्कड़ नाटक सनातन धर्म की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत होने के साथ साधु-संतों की छवि को भी नुकसान पहुंचा है।
महंत बालक दास ने कहा कि धार्मिक प्रतीकों और संत परंपरा का इस्तेमाल राजनीतिक प्रदर्शन के लिए नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को लेकर आपत्ति जताते हुए कानूनी कार्रवाई की मांग की।
संत समाज की ओर से दी गई तहरीर में राहुल गांधी, अवधेश प्रसाद और पप्पू यादव के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। संतों ने कहा कि कार्रवाई नहीं होने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
डीसीपी काशी जोन को सौंपे गए प्रार्थना पत्र में पुलिस से मामले की जांच कर नियमानुसार विधिक कार्रवाई करने की मांग की गई है। पुलिस की ओर से तहरीर प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए मामले की जांच का आश्वासन दिया गया है।
फिलहाल पुलिस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है और प्रदर्शन से जुड़े तथ्यों, वीडियो तथा आरोपों की पड़ताल के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।



